Showing posts with label Rajasthan Polity (राजस्थान राजनीति). Show all posts
Showing posts with label Rajasthan Polity (राजस्थान राजनीति). Show all posts

Saturday, 21 January 2023

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC)

राजस्थान लोक सेवा आयोग(RPSC)

स्थापना – 22 Dec. 1949

ली कमीशन 1923 :–  इस कमीशन ने भारत में एक संघ लोक सेवा आयोग की स्थापना की सिफारिश की थी, लेकिन प्रांतीय लोक सेवा आयोग पर विचार नहीं किया।

✍️  स्वतंत्रता के समय केवल राजस्थान की 3 रियासतों में लोक सेवा आयोग थे –
1. जयपुर 
2. जोधपुर
3. बीकानेर ।

RPSC के संवैधानिक प्रावधान :–
संविधान - भाग 4 
अनुच्छेद - 315 से 323 तक 
✍️ राज्य लोक सेवा आयोग के गठन, कार्य, शक्तियां, नियुक्ति, बर्खास्तगी का प्रावधान है।

अनुच्छेद 315 (1) – प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य लोक सेवा आयोग का गठन किया जाएगा ।

अनुच्छेद 315 (2) – दो से अधिक राज्यों के लिए संयुक्त लोक सेवा आयोग के गठन का प्रावधान भी है ।

अनुच्छेद 316 - राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति तथा कार्यकाल ।

नियुक्ति :-  मुख्यमंत्री के परामर्श पर राज्यपाल द्वारा ।

योग्यता :- आयोग के आधे सदस्यों को 10 वर्ष का केंद्र – राज्य सरकार में सरकारी सेवा का अनुभव होना चाहिए ।

✍️ अध्यक्ष का पद रिक्त होने पर वरिष्ठतम सदस्य को कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त करने की परंपरा है।

 कार्यकाल :- 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु ,जो भी पहले हो।
 
📝 RPSC के सदस्य अपनी पदावधि की समाप्ति के बाद उस पद पर सदस्य नियुक्त नहीं हो सकते हैं, लेकिन सदस्य को पदावधि समाप्ति के पश्चात अध्यक्ष नियुक्त कर सकते हैं।

📝 RPSC सदस्य तथा अध्यक्ष योग्यता के आधार पर UPSC अध्यक्ष / सदस्य नियुक्त किए जा सकते हैं ।

 RPSC अध्यक्ष सदस्य का त्याग पत्र - राज्यपाल को हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा लिखित में त्याग पत्र प्रस्तुत करेगा।

 अनुच्छेद 317 :- RPSC अध्यक्ष सदस्य को पद से हटाया जाना।
 • अध्यक्ष तथा सदस्यों को केवल कदाचार के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा उच्चतम न्यायालय(supreme court) की जांच के पश्चात हटाया जा सकता है ।
✓ राज्यपाल के प्रसादपर्यंत नहीं होंगे ।

NOTE :- जांच के दौरान अध्यक्ष तथा सदस्यों को राज्यपाल निलंबित कर सकता है।

कदाचार :-
• न्यायालय द्वारा दिवालिया घोषित।
• पद के कर्तव्यों से बाहर किसी सवेतन नियोजन में लगता है।
• राष्ट्रपति की राय में शारीरिक व मानसिक सत्य से दिल्ली से दिल लेकर कारण अपने पद पर बने रहने के लिए अयोग्य हो।

अनुच्छेद 318 :- सेवा - शर्तें ।

• RPSC के सदस्यों की संख्या तथा उनकी सेवा – शर्तें राज्यपाल द्वारा निर्धारित की जाती है।

• RPSC के अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति के बाद वेतन में अलाभकारी परिवर्तन नहीं कर सकते ।

RPSC सचिवालय :-
 एक सचिव + अन्य अधिकारी 
• प्रथम सचिव - श्याम सुंदर शर्मा
• वर्तमान सचिव - हरजी लाल अटल 

RPSC की संगठनात्मक संरचना

RPSC को 6 विभागों में बांटा गया है –

1. प्रशासनिक विभाग :- कर्मचारियों की सेवा शर्तें सुरक्षा व्यवस्था तथा रिकॉर्ड रखना।

2. भर्ती विभाग :- आवेदन पत्र प्राप्त करना परीक्षा की कार्यवाही साक्षात्कार करवाना ।

3. परीक्षा विभाग :- परीक्षा से संबंधित सुधार कार्य को कुशलता-पूर्वक संचालन करना।

4. लेखा विभाग :-बजट , आय-व्यय का आकलन करना।

5. विधि विभाग :- विधिक मामलों में परामर्श ।

6. शोध विभाग :- शोध कार्य करना ।

• RPSC के प्रथम अध्यक्ष – S.k. घोष
• RPSC के  2nd अध्यक्ष – S.C. त्रिपाठी 
• सबसे लंबा कार्यकाल – d.s. तिवारी 

• RPSC के वर्तमान सदस्य यश तिवारी बीजेपी अध्यक्ष कुमावत DGP अध्यक्ष 

• सबसे कम कार्यकाल वाले अध्यक्ष - P. S. यादव

• वर्तमान अध्यक्ष - संजय कुमार क्षोत्रिय

✍️ वर्तमान सदस्य
1. राजकुमारी गुर्जर
2. संगीता आर्य 
3. जसवंत राठी 
4. बाबूलाल कटारा
5. मंजू शर्मा  
6.________
7.________

राज्य मानवाधिकार आयोग ( State Human Rights Commission )

राज्य मानवाधिकार आयोग

✍️ जो अधिकार मनुष्य को बिना भेदभाव के सार्वभौमिक रूप से प्राप्त हो, उसे मानवाधिकार कहा जाता है ।
                                                 अर्थात गरिमापूर्ण जीवन के लिए, जो सार्वभौमिक अधिकार प्राप्त होते हैं, वही मानव अधिकार है ।

✍️ 1946 को एल्लोर रुजवेल्ट की अध्यक्षता में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना की गई।

✍️10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्रसंघ की महासभा में मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा की गई ।

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम : 1993 

✍️ इस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा राज्य मानवाधिकार आयोग के गठन का प्रावधान किया गया। 

🇮🇳 राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग 12 अक्टूबर 1993 
📝राजस्थान मानवाधिकार आयोग 18 जनवरी 1999

राजस्थान मानवाधिकार आयोग

गठन :– 18 जनवरी, 1999

कार्य प्रारम्भ :– 23 मार्च, 2000

✍️ यह राज्य सूची व समवर्ती सूची के विषयों पर कार्यवाही कर सकता हैं।

✍️ यह एक सांविधिक/ वैधानिक संस्था हैं।

संरचना :– 

• प्रारम्भ में – 1 अध्यक्ष + 4 सदस्य

• 2006 से – 1 अध्यक्ष + 2 सदस्य 

• वर्तमान में 2019 से संशोधन के पश्चात्  –

1 अध्यक्ष + 2 सदस्य + 1 महिला सदस्य

Total – 4

योग्यता :– 

✍️ High court ke सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य सेवानिवृत्त न्यायाधीश को अध्यक्ष बनाया जाता हैं।

2 सदस्य 1 सदस्य High court का न्यायाधीश या न्यूनतम 7 वर्ष के अनुभव वाला जिला न्यायाधीश रहा हो

1 सदस्य ऐसा व्यक्ति जो मानवाधिकार का ज्ञाता हो।

1 महिला सदस्य जो मानवाधिकार की ज्ञाता हो।

नियुक्ति :–

✍️ राज्यपाल द्वारा चयन समिति की सिफारिश पर, जिसमे 

• CM

• विधानसभा अध्यक्ष

• गृहमंत्री

• विधानसभा में विपक्ष का नेता

✍️ चयन समिति के अध्यक्ष CM होते हैं।

कार्यकाल :– 

✍️ 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु जो भी पहले हो।

NOTE :- कार्यकाल पहले 5 वर्ष या 70 की आयु हुआ करता था, जिसे 2019 में संशोधित करके 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु कर दिया गया।

NOTE :- यदि आयु 70 से कम हैं तो पुनः नियुक्ति भी की जा सकती हैं।

✍️ यदि अध्यक्ष की मृत्यु पदत्याग या अन्य कारण हो तो सदस्य अध्यक्ष के रूप में कार्य कर सकता हैं।


त्यागपत्र :– स्वयं हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा राज्यपाल को। 

हटाया जाना :– 

✍️ कदाचार या असमर्थता के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय जांच करेगा तथा जांच के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा हटाया जाता हैं।

Note :- यह राज्यपाल के प्रसाद पर्यन्त नहीं होता हैं।


कार्य :–

• मानव अधिकारों का संरक्षण करना ।

• मानवाधिकार उल्लंघन से संबंधित मामलों की जांच करना।

 • समय-समय पर जेल का निरीक्षण करना ।

• हिरासत में मृत्यु या फर्जी एनकाउंटर की जांच करना ।

• महिला / SC / ST के भेदभाव की जांच करना ।

• मानवाधिकार क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास करना।

 नोट :– यह 1 वर्षीय पुराने मामलों की जांच नहीं कर सकता।

 ✍️ राज्य मानवाधिकार आयोग को दीवानी अदालत की शक्तियां प्राप्त है।

 प्रथम अध्यक्ष – कांता भटनागर

 वर्तमान अध्यक्ष गोपाल कृष्ण व्यास 

सदस्य 

• महेश गोपाल 

• जस्टिस राम सिंह झाला ।


Telegram



राज्य निर्वाचन आयोग ( State Election Commission)

राज्य निर्वाचन आयोग 

Article 243K :- पंचायती राज संस्थाओं हेतु।

Article 243ZA :- नगर निकायों हेतु।

✍️ राज्य में पंचायतीराज तथा नगर निकायों के चुनाव संपादित करवाने हेतु राज्य निर्वाचन आयोग की स्थापना की गईं।

✍️ राज्य निर्वाचन आयोग एक स्वायत्त स्वतंत्र तथा संवैधानिक संस्था हैं इसका केन्द्रीय निर्वाचन आयोग से कोई संबंध नहीं है।

✍️ यह एक सदस्यीय आयोग है – राज्य निर्वाचन आयुक्त।

नियुक्ति :– राज्यपाल

त्यागपत्र :– राज्यपाल

✍️ यह राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त नहीं होते अर्थात् इन्हें राज्यपाल नहीं हटा सकता।
✍️ इन्हे हटाने की प्रक्रिया उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है
इस प्रक्रिया के तहत संविधान के उल्लंघन का दोषी पाए जाने पर राष्ट्रपति पद मुक्त करेगा।

कार्यकाल :– 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु

कार्य :–

• पंचायतीराज/नगर निकायों के निर्वाचन
• आचार संहिता लगाना तथा उनका पालन करवाना
•  मतदाता सूची update करना।
• चुनाव तिथियों की घोषणा करना
• पोलिंग पार्टी तथा पोलिंग बूथ का गठन करना।

अधिकार :–

1. चुनाव सम्बन्धी शिकायत से संतुष्ट होने पर चुनाव स्थगित कर सकता हैं।

2. मतदान केन्द्र पर हिंसा, कब्ज़ा या अपारदर्शिता हो जाए, तो पुनः चुनाव करवा सकता है।

3. इनसे संबंधित वाद को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।

गठन :– 1 July, 1994

H.Q. (मुख्यालय) :–  Jaipur 

राज्य निर्वाचन आयुक्त :–

1. अमरसिंह राठौड़
2. N.R. भसीन 
3. इंद्रजीत खन्ना 
4. अशोक कुमार पाण्डे
5. रामलुभाया 
6. प्रेमसिंह मेहरा 
7. मधुकर गुप्ता (वर्तमान)


✍️ राज्य में पहली बार पंचायत चुनाव 1960 में (पंचायती राज विभाग द्वारा)

✍️ राज्य में पहली बार शहरी निकाय चुनाव 1960 (स्थानीय नगरीय विभाग द्वारा)

✍️ राज्य निर्वाचन आयोग ने 1995 में प्रथम बार पंचायती राज तथा नगर निकायों का चुनाव करवाया।

Most Loved

राजस्थान की प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं✍

IndiaEnotes राजस्थान की प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं✍ प्रमुख सिंचाई परियोजनाएँ ● राजस्थान राज्य के लोक निर्माण विभाग से अलग होने के बाद 14 सितम...